भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अमीर गरीब में पड़ी जो खाई / हरियाणवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अमीर गरीब में पड़ी जो खाई।
गांधी बाब्बू नै कोन्या भाई।।
गरीब मजूरां का हक दिलाया।
अमीरां तै यूं उपदेस सुनाया।।
धन नै सांझा समझो भाई।
नहीं तो कहलाओगे कसाई।।