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अम्बे की मेंहदी रचनी / हिन्दी लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अम्बे की मेंहदी रचनी। गौरा की मेंहदी रचनी।
किन तेरे बाग लगाए और कौन सींचन जाए।।
म्हारै बाबा बाग लगाए, दादी सींचन जाए।।
अम्बे...

किसने पिसाए पात री, किसयाँ के रच गए हाथ री।
म्हारै ताऊ पिसाए पात री, ताई के रच गए हाथ री।।
अम्बे...

अम्बे की मेंहदी रचनी। गौरा की मेंहदी रचनी।
किन तेरे बाग लगाए और कौन सींचन जाए।।
म्हारै पापा बाग लगाए, मम्मी सींचन जाए।।
अम्बे...

किसने पिसाए पात री, किसयाँ के रच गए हाथ री।
म्हारै चाचा पिसाए पात री, चाची के रच गए हाथ री।।
अम्बे...

अम्बे की मेंहदी रचनी। गौरा की मेंहदी रचनी।
किन तेरे बाग लगाए और कौन सींचन जाए।।
म्हारै भईया बाग लगाए, भाभी सींचन जाए।।
अम्बे...

किसने पिसाए पात री, किसयाँ के रच गए हाथ री।
म्हारै जीजा पिसाए पात री, दीदी के रच गए हाथ री।।
अम्बे...