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अरज / रामेश्वर दयाल श्रीमाली

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म्हनै अजनम्यो ई रैवण दौ।

जनम ले ई लियो
तौ कांईं ?
थे म्हनै बांध देवोला
जात/कै धरम/कै परिवार
कै देस

रै नाम री
रूढियां री मोटी जेवड़ी सूं
अर रस्सी रा दोनूं ई छेड़ा
अेकै साथै
इण भांत खांचोला
कै नीं तौ म्हंनै मरण देवो
अर नीं जीवतो ई राखो

थांरै बंधणां री नागफांस
कई-कई सोनल रंग धर आसी
कदे ई मा री ममता रौ रंग
कदे ई बाप रै सहारै रौ रंग
कदे ई भाई री भुजा रौ रंग
कदे ई बैनड़ री राखड़ी रौ रंग
कदे ई देस री रोसनी रौ रंग
कदे ई धरम रै जेहाद रौ रंग

थे रंगीली/रेसमी/ आंटीली
गांठां नैं
नवो-नवो नाम दे’र
कसोला/ खांचोला
थे नेह/ नै हैज/ नै ममता रा
आंधा दीवा
इण भांत म्हारै चारूं मेर
दीपावोला
कै औ अन्धकुओ/ म्हने
आभै जिसो खुलो लागै
खुली हवा सूं हो जावै
नमूनियै रौ भौ
अंधारै में रोसनियां री ताराफूलियां
झरती भावै
नै सूर री साचेली किरणां
देखण री लळक
लामणीज जावै

कमरां री खिड़क्यां रै चारूं मेर
लटकावोला थे
परम्परावां रा पूर होयोड़ा
कसीदो काढ्योड़ा पड़दा
जिणसूं
थांरी कार में जीवण दीसै
अर
हकीकरत नै हामळण री
हीमत को होवै नीं
दिल नै दिमांग माथै जड़ देवोला थे
धरम रै लोह सूं ढ्ळया
अलीगढ़ी ताळा
संस्क्रितियां रै जादू री
खुलसिमसिम गुफा रै
अदीठ खजानै माथै
कोई भारी छीण
थांरै वास्तै फूल सूं ई हळकी
अर म्हारै वास्तै
भाखर सूं ई भारी

मूठियां मे बंद कर देवोला
जिन्दगी विगसावण वाळो
मुधरो वायरो
म्हैं ज्यूं इण पेट में बन्द हूं
अर मा रौ लोही पी’र जीवूं हूं
बधूं हूं
बारै ई थे म्हनै
जात/ नै देस / नै मजहब
री भींतां में
कैद राखोला
मिनख रौ लोही पा-पा’र
जिवाओला
अर प्यालां रौ नाम
कदेई सेवा/कदेई त्याग/ कदेई बळीदान
इण भांत राखोला
कै वो रगत ई
दूध निजर आवै
अर थै नित्त पावता जाओ
रगत
कोरो रगत/

म्हैं तौ गरभ में ई
थांरी
रीत-नीत बातां सुण-सुण’र
हैरान हूं
बारै कांई ठा कांई होसी?

अणजनम्यो ई रैवण दौ म्हानै।