भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अल्लाह नाम वालो / प्रीतम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अल्लाह नाम वालो, सुन लो कथा हमारी,
मस्जिद के तुम हो बंदे, मंदिर के हम पुजारी।

हैं नाम उसके कितने, पर एक ही ख़ुदा है,
हज़रत हुसैन वो ही, वंशी थी जिसकी प्यारी।

वह करबला में आया, गोकुल में भी वही था,
गीता बनाई उसने, जिसकी अज़ां है जारी।

कुरआन है जो उसका, तो वेद भी उसी का,
‘प्रीतम’ न फ़र्क़ समझो, दुनिया उसी की सारी।


रचनाकाल: सन 1922