भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अवरित आई बसन्त बहारन / ईसुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अवरित आई बसन्त बहारन
पान-फूल फल डारन।
बागन, बनन, बंगलन, बेलन
बीधन बगरं बजारन।
हारन और पहारन पारन,
घाम धवल जल धारन।
तपसी कुटिल कन्दरन खोरन।
गई बैराग बिगारन।
आए बौर मजीरन ऊपर
लगे भोंर गुजारन।
चहत अतीत, प्रीत प्यारे की।
हा हा करत हजारन।
ईसुर कन्त अन्त हैं जिनके
तिनें देत दुख दारून।