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असिये मन लोहा मँगाओल / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

असिये मन लोहा मँगाओल।
लाला, धनुखा कैलौं तैयार, जनकपुर जय जय हे॥1॥
देसहिं देस राजा नेओता पठाओल।
लाला, आयल सकल सब देव, जनकपुर जय जय हे॥2॥
कहँमा सेॅ आयल इसर महादेब।
लाला, कहँमा सेॅ नारद भगमान, जनकपुर जय जय हे॥3॥
कहँमा सेॅ आयल बरमा बिसुन।
लाला, कहँमा सेॅ ऐलै सेसनाग, जनकपुर जय जय हे॥4॥
कहँमा सेॅ आयल राम अरु लछुमन।
लाला, कहँमा सेॅ ऐलै हलुमान, जनकपुर जय जय हे॥5॥
सरँग सेॅ आयल बरमा बिसुन।
लाला, धरती सेॅ ऐलै सेसनाग, जनकपुर जय जय हे॥6॥
अजोधा सेॅ आयल राम आउर लछुमन।
लाला, जँगल सेॅ आयल हलुमान, जनकपुर जय जय हे॥7॥
सब देउतन मिलि धनुखा ढाहन लागे।
लाला, छुइ छुइ रहल लजाय, जनकपुर जय जय हे॥8॥
एतना सुनिए राजा, मनहिं दुखित भेल।
लाला, अब सिया रहलि कुमार, जनकपुर जय जय हे॥9॥
जबहे सीरी रामचंदर धनुखा ढाहन लागे।
लाला, धनुखा कैलन तीन खंड, जनकपुर जय जय हे॥10॥
एतना सुनिए राजा मनहिं अनंद भेल।
लाला, जय जय बोले सब देब, जनकपुर जय जय हे॥11॥

शब्दार्थ