भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अस भूलन परी अपार हो / संत जूड़ीराम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अस भूलन परी अपार हो पारख मिले न पारखी।
ओंकार के पदे में हो भटक फिरे संसार।
अक्षर को चीन्हों नहिं अर मिल करत निहार हो।
इच्छा माया रची पांच तत्त गुण तीन।
काल कर्म लै संचरों दुख-सुख भयो अधीन हो।
जो लो मिसरत तत्त की तो लो सुखी जमत।
मिसरत छूटी महल से भयो अंध को पत्र हो।
विन विवेक मत बाबरी कहत थतोला बात।
जूड़ीराम शबदै लखै शीतल भयो न गात हो।