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आँख केॅ नींद हमेशे लेॅ जे आबी गेलै / अमरेन्द्र

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आँख केॅ नींद हमेशे लेॅ जे आबी गेलै
सौ कहानी भी हमरोॅ साथ में लागी गेलै
ककरोॅ ई याद फेनू मन में उभरलोॅ आबै
कौनें गुदरी केॅ फेनू हौले सें तागी गेलै
आबेॅ तेॅ सब्भे मिली साँपो नै नाँथेॅ पारै
सौ फनोॅ वाला केॅ कृष्णा कना नाँथो गेलै
जानेॅ कहिया बनी गौतम ऊ दुआरी ऐतै
जेकि राहुल केॅ भरी नीनोॅ में त्यागी गेलै
दिन में ई आँख झपकतेॅ ही रहलै सौसें दिन
रात ऐलै तेॅ कहीं नीनो भी भागी गेलै
एक दुल्हैंने नी लाना छेलै दुल्हाजी केॅ
सौ गो फेनू कथी लेॅ साथ बराती गेलै
जहिया लेलिन केरोॅ सपना सुनोॅ मिटी जैतै
जानियॉे पूसोॅ में टुअरे केरोॅ गाँती गेलै
एक जे भीड़ में लिखबैया छेलै अमरेन्दर
मान कम होतै वहू आखरी साथी गेलै

-1.6.92