हरियाणवी लोकगीत ♦ रचनाकार: अज्ञात
आंगन बरसै सोहाग बदरी भीतर दुलारी न्हाय
दादी ने सोहाग दीन्हा भर मांगो के बीच
बदरिया बरसै
पोस्त बोया बन्ने के बाबा, दादी बोवै लाल महेंदी
आज यहीं रहो रे बन्ने, बरसती है सोहाग बदरी
बदरिया बरसै
अम्मा चाची ने भर दिया गुलाल, मामी भाभी ने गूंथे फूल
बीबी हमारी सजी राधा सी, बरसती है सोहाग बदरी
बदरिया बरसै