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आई रितु़ड़ी रे सुणमुणया रे / गढ़वाली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

आई रितु़ड़ी[1] रे सुणमुणया[2] रे
आई गयो बालो[3] वसन्त रे।
फूलण लैगी गाडू[4] की फ्योंलड़ी[5]
सेरा[6] की मींडोली[7] नैं डाली पैंया[8] जामी।
कूली[9] का ढीसोली[10], नैं डाली पैंया जामी।
चला दीदि भुलेऊँ, नैं डाली पैंया जामी।
क्वी मीटी काट्यौला, नैं डाली पैंया जामी।
क्वी दुंगा[11] चाड़ यौला, नैं डाली पैयां जामी।
दूपत्ति[12] ह्वे गये, नैं डाली पैंया जामी।
द्यू करा धूपाणों, नैं डाली पैंया जामी।
क्वी दूद चार्यौंला, नैं डाली पैंया जामी।
चौपत्ति ह्वे गये, नैं डाली पैंया जामी।
द्यवतों का सत्तन, नैं डाली पैंया जामी।
दूफौंकी ह्वे गये, नैं डाली पैंया जामी।
झपन्याली[13] ह्वे गये, नैं डाली पैंया जामी।
चला छैलू[14] बैठ्यौला, नैं डाली पैंया जामी।
धौली[15] का किनारा, यो फूल के को[16]?
अनमन[17] भांति को, यो फूल के को?
सैरो[18] बोण[19] मोयेणे[20] यो फूल के को?
सैरो धौली धुमैली[21], यो फूल के को?
देवतों सरोख्या[22], यो फूल के को?
टोपी मा धर[23] लेणू, यो फूल के को?
धौली का किनारा, यो फूल के को?

शब्दार्थ
  1. ऋतु
  2. सुहावनी
  3. किशोर
  4. नदी, तट
  5. फ्यूली, फूल
  6. खेत
  7. मेंड
  8. पù
  9. कूल, पानी
  10. ऊपर
  11. पत्थर
  12. दो पत्ती
  13. हरी-भरी
  14. छाया
  15. नदी का नाम
  16. किसका
  17. अनोखा
  18. सारा
  19. वन
  20. मोहित
  21. धुंधली
  22. समान
  23. रखना