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आकाश / श्रीनाथ सिंह

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जिसमे अपनी नाव चलाता,
दिन भर सूरज चमकीला।
और रात में तारों को ले,
चन्द्र जहाँ करता लीला।
जिसकी गोदी में शिशु हाथी,
सा फिरता बादल गीला।
हिलती हरियाली के ऊपर,
छाया जो नीला नीला।
वह ही है आकाश बालकों,
जिसका है कुछ ओर न छोर।
गर्व बड़प्पन का हो जिसको,
पहले देखे उसकी ओर।