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आखरी कफन लेॅ / रमेंद्र कुमार भट्टाचार्य 'रत्न'

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आय सें कुछ साल बाद
जबेॅ जमीन के हरेक इंच पर
आदमिये आदमी होतै
उ वक्ती अन्न आरो पानी बिना
आदमी नै चलेॅ सकतै, नै बुलेॅ सकतै;
उ समय आदमिये आदमी केॅ
खाय केॅ जीत्तेॅ रहतै
ई नाँखि सबकेॅ चिबाय केॅ
एगो आदमी बची जैतै ।
ऊ आखरी आदमी केॅ
आखरी कफन दियै लेॅ
अय चाँद, अय सुरूज
तोहें थोड़ोॅ देर लेली आकास पर रुकी जइयोॅ !
नै तेॅ ऊ आखरी आदमी के लहाश
यहाँ नंगे दफन होय जैतै ।