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आगू आगू नाचै छै कहरिया रे / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

इस विधि को सम्पन्न करत समय दुलहे की माँ को गालियाँ देने का प्रचलन है। दुलहे की माँ का पुरुष वेष धारण करने और उसके नाचने का उल्लेख इस गीत में हुआ है।

आगू[1] आगू नाचै[2]छै कहरिया रे, पिछू[3] नाचै चमार।
ताहिं[4] पिछू नाच करे कवन छिनार, अच्छा लागै[5] छौ गे माय॥1॥
पीन्ह[6] गे छिनरिया सोहलो[7] पोसाक, कम्मर[8] बाँन्ह तरबार[9]
मरद के भेस बनि निकललै बजार, कम्मर बाँन्ह तरबार॥2॥

शब्दार्थ
  1. आगे
  2. नाचता है
  3. पीछे
  4. लगता है
  5. लगता है
  6. पहनो
  7. सोलहो
  8. कमर
  9. तलवार