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आजु अवधपुर आनद भेल हे, सखि आजु अवधपुर / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

तिलक पड़ने के बाद राम के वस्त्राभूषणों से सज्जित होकर हाथ में नारियल आदि मांगलिक द्रव्यों को लेने, मंडप पर बैठने और दूब-अक्षत आदि से उन्हें मंगल-गान के साथ चुमाने का उल्लेख इस गीत में हुआ है।

आजु अवधपुर आनंद भेल हे, सखि आजु अवधपुर।
गाय के गोबर से अँगना निपाओल[1], गजमोती चौका[2] पुराओल हे।
आजु अवधपुर तिलक भेल हे, सखि आजु अवधपुर॥1॥
रामजी के हाथ सुपारी भल सोभै, चन्नन सोभै लिलार हे।
रामजी के हाथ नरियर भल सोभै, गले बीच मोतियन के माल हे॥2॥
रामजी के हाथ अँगूठी भल सोभै, सिर में सोभै टेढ़ी पाग हे।
दूबी अछतिया[3] से अम्माँ चुमाओल, सखि सब मंगल गाओल हे।
आजु अवधपुर आनंद भेल हे, सखि आजु अवधपुर॥3॥

शब्दार्थ
  1. लिपवाया
  2. मांगलिक कार्य के लिए आटे आदि की रेखाओं से चौकोर चित्र बनाना
  3. अक्षत