आज फिर याद पुरानी वो कहानी आई,
उम्र हल्की-सी हुई फिर से जवानी आई ।
ख़त का रंग खुद ही गुलाबी-सा हुआ,
और कुछ बात तेरी याद जुबानी आई ।
दिन को फूलों से बहुत हमने सजा कर रखा,
ख़्वाब में आई तो बस रात की रानी आई ।
अब भी हाथों को मेरे तेरा भरम होता है
जब भी हाथों में मेरे तेरी निशानी आई ।