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आज लाड़ो केरा अजबी बहार रे बना / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

आज लाड़ो[1] केरा अजबी बहार रे बना।
बाना[2] सुरती[3] गजबी सोहार[4] रे बना॥1॥
बाना, अपन अपन नयनमा[5] सम्हार रे[6] बना।
बाना, लगी जयतउ नजरी के बान रे बना॥2॥
बाना, दुलहा हइ दुलहिन के जोग रे बना॥3॥

शब्दार्थ
  1. लाड़ली
  2. भद्र, दुलहा
  3. शक्ल-सूरत
  4. शोभायमान, सुन्दर
  5. नयन
  6. सँभालो