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आपकी याद चली आई थी कल शाम के बाद / मनोज मनु

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आपकी याद चली आई थी कल शाम के बाद ।
और फिर हो गई एक ताज़ा ग़ज़ल शाम के बाद ।।
 
मेरी बेख़्वाब निग़ाहों की अज़ीयत मत पूछ ।
अपना पहलू मेरे पहलू से बदल शाम के बाद ।।
 
मसअला मेज पे ये सोचके छोड़ आया हूँ ।
अब न निकला तो निकल आयेगा हल शाम के बाद ।।
 
तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात के गम ।
तू किसी रोज़ मेरे घर में निकल शाम के बाद ।।
 
छोड़ उन ख़ानाबदोषों का तज़्करा कैसा ।
जो तेरा शह्र ही देते हैं बदल शाम के बाद ।।
 
कोई काँटा भी तो हो सकता है इनमें पिन्हा ।
अपने पैरों से न फूलों को मसल शाम के बाद ।।