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आमद / शीन काफ़ निज़ाम

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घर
सहर[1] के समर[2]
दर[3] दरख़्शिन्दा[4] हुए
सनसनाते नगर में सोए
सवेरे जाग उट्ठे

आँख-अंधों ने
ज़बाँ-गूंगों ने
बहरों ने समाअत[5]
और सबा[6] ने सब्र पाया
आ चुके या आ रहे हो
तुम!


शब्दार्थ
  1. प्रातःकाल
  2. फल
  3. दरवाज़ा
  4. दीप्त
  5. श्रवण-शक्ति
  6. प्रातःकाल की हवा