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आमार मनेर मानुष, प्राण सइ गो (भाटियाली) / बांग्ला

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

आमार मनेर मानुष, प्राण सइ गो
पाइगो कोथा गेले।
आमि याबो सेइ देशे
से देशे मानुष मिले।।
यदि मनेर मानुष पेतेम तारे हद मझारे
बसाइताम अति यतन कइरे।.।
आमि मन-सुते माला गेंथे
दिताम ताहार गले।।
भेवे छिलाम मने मने, से याबे ना आमार छेड़े,
आरे आपन बइले।
से ये फाँकि दिये गेलो चले,
ऐ कि छिल मोर कपाले।।
इसी प्रकार यह गीत दैहिक अथवा काया संबंधित है---
आरे मन माझि, तोर बैठा नेरे,
आमि आर बाइते पारलाम ना।
आमि जनम भइरा बाइलाम बैठा रे
तरी भाइटाय रय, आर उजाय ना।।
ओरे जंगी-रसी यतइ कसि,
ओ रे हाइलेते जल माने ना।
नायेर तली खसा गुरा भांगारे,
नाव तो गाव-गयनि माने ना।।