भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आम में बौर आ गए / देवेन्द्र कुमार

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आमों में बौर आ गए
डार-पात फुदकने लगे
कब के सिर मौर आ गए ।

खुली पड़ी धूप की किताब
रंगों के बँट रहे खिताब
जाँबाजों की बस्ती में
कुछ थे कुछ और आ गए ।