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आया अयोध्या वाला कुवर दो / निमाड़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

    आया अयोध्या वाला कुवर दो

(१) राजा जनक तो जग में हो ठाड़ा
    शोभा वर्णी न जाई
    उठ सभा दल देखण लागी
    उग्या भवन का तारा...
    कुवर दो...

(२) यो रे धनुष कोई सी हाले न डोले,
    लख जोधा आजमाया
    रावण सरीका पड्या खिसाणा
    भवपती गरब हरायाँ...
    कुवर दो...

(३) लक्ष्मण सुणो बंधु रे भाई,
    गुरु की नी आज्ञा पाई
    डावी भुजा सी धरणी क तोकु
    धनुष की कोण बिसात...
    कुवर दो...

(४) गुरु की आज्ञा पाई राम न,
    चरणो म शीश नमाया
    इनी रे भूमी पर है कोई योद्धा
    धनुष का टुकड़ा उड़ाया
    कुवर दो...

(५) सिता रे ब्याही न राम घर आया,
    घर-घर आनंद छाया
    माता कौशल्या न आरती सजाई
    राम बधाई घर लाया...
    कुवर दो...