भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आल्हा: गाँधी की सालगिरह पर / प्रदीप शुक्ल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गाँधी बाबा गाँधी बाबा...आजु क आल्हा सुनौ हमार!
भूल चूक सब माफ़ कई देह्यो ईश्वर के तुम तौ अवतार!!

कहाँ चले गयो गाँधी बाबा तुम्हरे बिना सून संसार!
मोदी तुमका रोजु बुलावैं करि देव उनका बेड़ा पार!!

झाडू लईकै तुम आ जावौ गन्दी बहुत भई सरकार!
सड़क सफाई ते कुछु ना होई काली भेड़ें देव निकार!!

यहै बात मोदी ते कहि द्यो काने मा धीरे समझाय!
हर बिभाग के बेईमानन का बाहर रस्ता देव देखाय!!

तबहीं नामु होई भारत का वरना होई जाई बंटाधार!
सुनौ सुनौ तुम जल्दी आवौ एतनी मानौ बात हमार!!

तुम्हरी टोपी झाडू लैकै... आये रहें केजरीवाल!
बहुत दिनन ते उई गायब हैं उनका कोऊ न पुरसाहाल!!

झाडू उनकी छीन लीनि गै टोपी खुदै उई दिहिन उड़ाय!
गांधी बाबा बचे रहैं तो उनका साहेब लिहिन उठाय!!

गांधी तुमका काँधे लादि क लईगे रहैं समुन्दर पार!
पूरे जग मा कहि आये हैं अब ते गांधी हवैं हमार!!

कांग्रेस की लुटिया डूबी... उनका गवा है साँप सुंघाय!
मोदी भग्मच्छरु कीन्हे हैं उनकी न कौनियु काट सुझाय!!