भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आवोॅ प्रेमी भइया / रामधारी सिंह 'काव्यतीर्थ'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आवोॅ प्रेमी भइया हमरोॅ अंगनमाँ हो
‘छोटू’ के सातम जनम दिनमा हो
आवोॅ मिली-जुली केॅ
कि पूजोॅ गुरू के चरणियाँ हो मिली-जुली केॅ।
सब्भे प्रेमी भैया सें हमरोॅ अरजिया
गुरू महाराज जी के करोॅ गुणगणियाँ
से मिली-जुली केॅ
कि करोॅ सत्संगवा सब मिली-जुली केॅ।
भक्त बनै, सेवक बनै, बनलोॅ छै अरदसिया
सब्भे मिली ‘छोटू’ केॅ दोहोॅ आर्शीवदिया
से मिली-जुली केॅ
कि दोहोॅ शुभ आशीषवा मिली-जुली केॅ।