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आशिक़ों की भंग-1 / नज़ीर अकबराबादी

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दुनिया के अमीरों में याँ किसका रहा डंका ।
बरबाद हुए लश्कर, फ़ौजों का थका डंका ।
आशिक़ तो यह समझे हैं, अब दिल में बना डंका ।
जो भंग पिएँ उनका बजता है सदा डंका ।

                    कूंडी के नक़्क़ारे पर, ख़ुतके का लगा डंका ।।
                    नित भंग पी और आशिक़, दिन रात बजा डंका ।।१।।

उल्फ़त के जमर्रुद[1] की, यह खेत की बूटी है ।
पत्तों की चमक उसके कमख़्वाब[2] की बूटी है ।
मुँह जिसके लगी उससे फिर काहे को छूटी है ।
यह तान टिकोरे[3] की इस बात पे टूटी है ।

                    कूंडी के नक़्क़ारे पर, ख़ुतके का लगा डंका ।।
                    नित भंग पी और आशिक़, दिन रात बजा डंका ।।२।।

हर आन खड़ाके से, इस ढब का लगा रगड़ा ।
जो सुन के खड़क इसकी हो बंद सभी दगड़ा[4]
चक़्कान[5] चढ़ा गहरा, और बाँध हरा पगड़ा[6]
क्या सैर की ठहरेगी टुक छोड़ के यह झगड़ा ।

                    कूंडी के नक़्क़ारे पर, ख़ुतके का लगा डंका ।।
                    नित भंग पी और आशिक़, दिन रात बजा डंका ।।३।।

एक प्याले के पीते ही, हो जावेगा मतवाला ।
आँखों में तेरी आकर खिल जाएगा गुल लाला[7]
क्या क्या नज़र आवेगी हरियाली व हरियाला ।
आ मान कहा मेरा, ऐ शोख़[8] नए लाला ।

                    कूंडी के नक़्क़ारे पर, ख़ुतके का लगा डंका ।।
                    नित भंग पी और आशिक़, दिन रात बजा डंका ।।४।।

हैं मस्त वही पूरे, जो कूंडी के अन्दर हैं ।
दिल उनके बड़े दरिया, जी उनके समुन्दर हैं ।
बैठे हैं सनम बुत हो, और झूमते मन्दिर हैं ।
कहते हैं यही हँस-हँस, आशिक़ जो कलन्दर[9] हैं ।

                    कूंडी के नक़्क़ारे पर, ख़ुतके का लगा डंका ।।
                    नित भंग पी और आशिक़, दिन रात बजा डंका ।।५।।

सब छोड़ नशा प्यारे, पीवे तू अगर सब्जी ।
कर जावे वही तेरी, ख़ातिर में असर सब्जी ।
हर बाग में हर जाँ[10] में, आ जावे नज़र सब्जी ।
तेरी भी ’नज़ीर’ अब तो सब्जी में है सर सब्जी ।

                    कूंडी के नक़्क़ारे पर, ख़ुतके का लगा डंका ।।
                    नित भंग पी और आशिक़, दिन रात बजा डंका ।।६।।

शब्दार्थ
  1. पन्ना, हरा रत्न
  2. बहुमूल्य वस्त्र, एक प्रकार का रेशमी वस्त्र
  3. नौबत की आवाज़
  4. कच्ची सड़क
  5. गाढ़ी घुटी हुई भंग
  6. बड़ी पगड़ी
  7. लाल रंग के प्रसिद्ध फूल
  8. चंचल
  9. मस्त और आज़ाद फ़कीर
  10. हर जगह