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आ री कोयल / श्रीप्रसाद

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आ री कोयल, गा री कोयल
मीठे गाने गा
मेरी इस नन्ही बगिया में
शाम-सुबह तू आ

पक्षी आते, शोर मचाते
बगिया भर जाती
सूरज मुसकाता पेड़ों पर
किरण-किरण आती

फूलों वाली, बड़ी निराली
बगिया है सुंदर
दिनभर हवा चला करती है
गम-गम, मधुर-मधुर

तू आएगी, तू गाएगी
सुन करके गाना
खिल-खिल-खिल हँस देगी बगिया
कोयल, तू आना।