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आ रै मेरा सम्पटपाट / मानसिंह शेखावत 'मऊ'

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आ रै मेरा सम्पटपाट।
मैं तनैं चाटूं तूँ मनैं चाट।।
आ लागां लूंठां कै लै'र।
ल्या घोळां जाति को झै'र।।
समरसता की कोन्यां खै'र।
बाड़-बाड़ में कर'द्यां बै'र।।
काटां दावण तोड़ां खाट।
आ रै मेरा सम्पटपाट।। 1।।

मैं तनैं चाटूं तूँ मनैं चाट !!

बोदां को ल्या काडां तेल।
आ चूंसाँ बण अम्मरबेल।।
आ खेलां बोटां को खेल।
ल्या रैल्यां की रेलमपेल।।
दारू बाँटां भर-भर माँट।
आ रै मेरा सम्पटपाट।।2।।

खोदां खाई भरद्या खार।
मिनखपणैं की कर'द्या गार।।
संतपणैं मैं कांई सा'र।।
कर मूसळ की जै-जै कार।।
आ भोगां सत्ता का ठाट।।
आ रै मेरा सम्पटपाट।।3।।

गोठ-घूघरी रोज करां।
चंदो चाटां मोज करां।।
घोटाळां की खोज करां।
भलो काम म्हे नो'ज करां।।
मोका सूं मिल काडां घाट।
आ रै मेरा सम्पटपाट।।4।।

आ'ज्या भारत बंद करां।
मजलूमां नैं तंग करां।।
ले गुटकी आनंद करां।
गोबर को गुळकंद करां ।।
मालपुवां की बंदरबांट।
आ रै मेरा सम्पटपाट।।5।।

मैं तनैं चाटूं , तूँ मनैं चाट !!!