Last modified on 18 सितम्बर 2017, at 17:01

इज़्ज़तपुरम्-27 / डी. एम. मिश्र

शाम की
कतई
जल्दी नहीं

पर सबेरा
कब होगा?
यही चाहता है
हर मेहनतकश
हाथ

क्यों नहीं
होने लगता
दिन चौबीस घंटे का?