भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इतनी बात / कृष्ण शलभ

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुन्ना बोला-ओ री अम्माँ,
मेरी गुल्लक में कुछ पैसे,
जिनको मैंने जोड़-जोड़ कर
रख छोड़े हैं, जैसे-तैसे।

इन पैसों से पहले सोचा
जाकर खेल-खिलौने लाऊँ,
फिर यह सोचा, इन पैसों से
डट कर चाट-पकौड़ी खाऊँ।

लेकिन फिर यह मन में आया
अम्माँ अपना रामलुभाया,
लगता है वह दुखी बड़ा है
कल कक्षा में खाली आया।

उसके पास किताब नहीं है,
तब यह सोचा, यही सही है,
उसको चलूँ, किताबें ले दूँ
इतनी बात आपसे कह दूँ!