भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इन वारे बनरे की लगुन हो आई / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इन वारे बनरे की लगुन हो आई।
लगुन हो आई बागन बिलमाई।
सो होती आवाजें आजुल दरवाजें,
रानी आजी के द्वारें।
इन वारे बनरे...
सो होती आवाजें बाबुल दरवाजे
रानी मैया के द्वारे।