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इम्तिहान / पतझड़ / श्रीउमेश

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इम्तिहान के दिन-ऐलै लड़का सब हमरा छाया तर।
चीट-लिखैछै, चोरी करतै, लिखतै अपना कांपी पर॥
‘चिट-चोरी’ के बली पर भैया, आज करै छेॅ सम्भैं पास।
पढ़ी-लिखी केॅ पास करै छै? यैसें नैछै ध्यान प्रकास॥
‘इन्टर-व्यू’ में पूछै छै, के छिलै द्रौपदी धरती पर?
“हंली उड’ के एक नर्तकी” प्रत्यासीं दै छै उत्तर॥
बिना ग्यान के कहाँ नौकरी? मान कहाँ? सम्मान कहाँ?
बिना ग्यान के ‘हास्य-पात्र’ बनि रहोॅ कहोॅ कल्यान कहाँ?
पढ़ी-लिखी केॅ कौनेॅ पास करै छै फस्ट-डिवीजन में?
चोहियै सें सब काम बनैछै, मरदानी छै जीवन में॥