भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इस दुनियादारी का कितना भारी मोल चुकाते हैं / हस्तीमल 'हस्ती'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इस दुनियादारी का कितना भारी मोल चुकाते हैं
जब तक घर भरता है अपना हम ख़ाली हो जाते हैं

इंसानों के अंतर्मन में कई सुरंगें होती हैं
अपने आपको ढूँढ़ने वाले ख़ुद इनमें खो जाते हैं

अपने घर के आँगन को मत क़ैद करो दीवारों में
दीवारें ज़िंदा रहती हैं लेकिन घर मर जाते हैं

आने को दोनों आते हैं इस जीवन के आँगन में
दुख अरसे तक बैठे रहते सुख जल्दी उठ जाते हैं

एक हिसाब हुआ करता है लोगों के मुस्काने का
जितना जिससे मतलब निकले उतना ही मुस्काते हैं