भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इस युग में / समीर बरन नन्दी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जोते हुए खेत की नई दूब पर
सुबह की सुनहरी धूप में
चारो ओर असंख्य
बूँद-बूँद सोना बिछा हुआ है ।

इस वर्ष हरसिंगार के सफ़ेद-पीले फूल
मरे हुए हंसो की तरह गिरे है
देखता हूँ आँख तले-पाँव तले बिछ आया है --

मरण आतुर अनंत सुनहला जीवन ।