भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ईदगाह अकबराबाद (आगरा) / नज़ीर अकबराबादी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

है धूम आज मदरसओ ख़ानकाह[1] में।
तांते बंधे हैं मस्जिदे जामा[2] की राह में।
गुलशन से खिल रहे हैं हर इक कज कुलाह[3] में।
सौ-सौ चमन झमकते हैं एक-एक निगाह में।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥1॥

झमका है हर तरफ़ का जो आ बादला ज़री[4]
पोशाक में झमकते हैं सब तन ज़री-ज़री[5]
गुलरू[6] चमकते फिरते हैं जूं माहो[7] मुश्तरी[8]
हैं सबके ईद-ईद की दिल में खुशी भरी।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥2॥

आते हैं घर सेस अपने जो बन-बन के कज कुलाह।
सहने चमन है जितनी है सब सहने ईदगाह।
छाती से लिपटे जाते हैं हंस-हंस के ख़्वामख़्वाह।
दिल बाग[9] सबके होते हैं फरहत[10] से वाह-वाह।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥3॥

कुछ भीड़ सी है भीड़ कि बेहदो बेशुमार।
खल्क़त[11] के ठठ के ठठ हैं बंधे हर तरफ़ हज़ार।
हाथी व घोड़े, बैलो, रथ व ऊंट की कतार।
गुलशोर बाले भोले खिलौनों की है पुकार।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥4॥

पहने फिरें हैं शोख़[12] कड़े और हंसलियां।
फूलों की पगड़ियों में हैं शाखे़ उड़सलियां।
कमरें सभों ने मिलने की ख़ातिर हैं कस लियां।
मिलते हैं यूं कि छाती की कड़के हैं पसलियां।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥5॥

आते हैं मिलते-मिलते जो आज़िज परीरुखां[13]
देते हैं मिलने वालों को घबरा के गालियां।
तिस पर भी लिपटे जाते हैं जू गुड़ पे मक्खियां।
दामन के टुकड़े उड़ते हैं फटती हैं चोलियां।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥6॥

हैं मिलते-मिलते तन जो पसीनों में तर बतर।
मिलने के डर से फिरते हैं छिपते इधर-उधर।
छिपते फिरें हैं लोग भी जाते हैं वह जिधर।
ठट्ठा हंसी व सैर तमाशे जिधर जिधर।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥7॥

हैं करते वस्ल शहर के सब खु़र्द[14] और कबीर[15]
अदना[16], गरीब, अमीर से ले शाह ता वज़ीर।
हर दम गले लिपट के मेरे यार दिल पज़ीर[17]
हंस-हंस के मुझ से कहता है यूं क्यूं मियां ‘नज़ीर’।
क्या-क्या मजे़ हैं ईद के आज ईदगाह में॥8॥

शब्दार्थ
  1. फ़क़ीरों और साधुओं के रहने का स्थान, आश्रम
  2. वह मसजिद जिसमें जुमा, शुक्रवार, की नमाज पढ़ी जाती है, जामा मसजिद
  3. टेढ़ी टोपी पहनने वाला, माशूक
  4. दो कपड़ों के नाम, बादला-सोने और चांदी के चिपटे चमकीले तार जो गोटा बुनने और कलावत्तू बटने के काम आते हैं, ज़री का कपड़ा जो रेशम और चांदी के तारों से बुना जाता है
  5. सुनहरी
  6. फूल जैसे सुन्दर सुकोमल मुख वाली नायिका
  7. चांद
  8. वृहस्पति, यह छठे आसमान पर है
  9. बहुत खुश
  10. खुशी
  11. जनता
  12. चंचल, प्रिय पात्र
  13. परियों जैसी शक़्ल सूरत वाले
  14. छोटे
  15. बड़े
  16. साधारण
  17. दिलपसंद