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ईदुलफ़ित्र / नज़ीर अकबराबादी

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है आबिदों[1] को ताअ़तो-तज़रीद[2] की खु़शी।
और ज़ाहिदों[3] को जुहद[4] की तमहीद[5]
रिंद[6] आशि़कों को है कई उम्ीद की खु़शी।
कुछ दिलबरों[7] के वस्ल[8] की कुछ दीद[9] की खु़शी।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥1॥

रोजे़ की खु़श्कियों से जो हैं ज़र्द-ज़र्द[10] गाल।
खु़श हो गए वह देखते ही ईद का हिलाल[11]
पोशाकें तन में ज़र्द, सुनहरी, सफ़ेद, लाल।
दिल क कि हंस रहा है पड़ा तन का बाल-बाल।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥2॥

पिछले पहर से उठके नहाने की धूम है।
शीरो[12] शकर सिवैयां पकाने की धूम है।
पीरो[13] को नेअमते[14] खाने की धूम है।
लड़कों को ईदगाह के जाने की धूम है।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥3॥

बैठे हैं फूल-फूल के मैख़ाना[15] में कलाल[16]
और भंग ख़ानों में भी है सरसब्जियां कमाल।
छनती हैं भंगें, उड़ते हैं चरसों के दम निढाल।
देखो जिधर को सैर मज़ा ऐश क़ीलोक़ाल[17]
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥4॥

कोई तो मस्त फिरता है जामें[18] शराब से।
कोई पुकारता है कि छूटे अज़ाब[19] से।
कल्ला किसी का फूला है लड्डू की चाब से।
चटकारें जी में भरते हैं नानो[20] कबाब से।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥5॥

महबूब दिलबरों से है जिनकी लगी लगन।
उनके गले से आन लगा है जो गुल बदन।
सौ सौ तरह की चाह से मिल-मिल के तन से तन।
कहते हैं तुमको ईद मुबारक हो जानेमन[21]
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥6॥

क्या ही मुआनके़[22] की मची है उलट पलट।
मिलते हैं दौड़-दौड़ के बाहम[23] झपट-झपट।
फिरते हैं दिलबरों के भी गलियों में ग़ट के ग़ट[24]
आशिक मजे़ उड़ाते हैं हर दम लिपट-लिपट।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥7॥

काजल हिना[25] ग़जब मिसी-व-पान क धड़ी।
पिश्वाजे़ं[26] सुर्ख, सोसनी[27] लाही[28] की फुलझड़ी।
कुर्ती कभी दिखा कभी अंगिया कसी कड़ी।
कह ईद-ईद लूटे हैं दिल को घड़ी-घड़ी।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥8॥

जो जो कि उनके हुश्न की रखते हैं दिल से चाह।
जाते हैं उनके साथ लगे ताब[29] ईदगाह।
तोपों के शोर और दुगानों[30] की रस्मो राह।
मियाने, खिलौने, सैर मजे़ ऐश वाह-वाह।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥9॥

रोज़ों की सख़्तियों में न होते अगर असीर[31]
तो ऐसी ईद की न खु़शी होती दिल पज़ीर[32]
सब शाद हैं गदा[33] से लगा-शाह[34] ता-वज़ीर।
देखा जो हमने खू़ब तो सच है मियां ”नज़ीर“।
ऐसी न शब्बरात न बक़रीद की खु़शी।
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की खु़शी॥10॥

शब्दार्थ
  1. उपासक, इबादत करने वाला, भक्त
  2. उपासना, आराधना, इबादत
  3. कर्मकाण्डियों
  4. धार्मिक, कृत्य, संयम
  5. पालन
  6. मद्यप, रसिया, धार्मिक बन्धनों से मुक्त
  7. प्रेमपात्र
  8. प्रेमी, प्रेमिका का मिलन
  9. दर्शन, दीदार
  10. पीले
  11. बालचन्द्र, नया चांद
  12. दूध
  13. वृद्ध
  14. अच्छी चीजें
  15. मधुशाला
  16. शराब बेचने वाले
  17. वाद विवाद, बहस-मुवाहिसा
  18. चषक, शराब का प्याला
  19. पापों का यमलोक में मिलने वाला दण्ड, दुःख
  20. रोटी
  21. प्रिय
  22. गले मिलना
  23. आपस
  24. झुंड के झुंड
  25. मेंहदी
  26. नृत्य के समय पहना जाने वाला लहंगा, लहंगा
  27. नीले रंग की
  28. रेशम
  29. तक, ईदगाह
  30. शुक्राने की नमाज की दो रक़असें
  31. बंदी, परेशान
  32. दिल पसंद
  33. फ़क़ीर
  34. बादशाह