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उच्चो सो पीप्पल कोपळयो हो देवी / निमाड़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

उच्चो सो पीप्पल कोपळयो हो देवी,
वहाँ बठी गाय गोठाण।
चादर पिछोड़ी को गाळयो हो देवी,
रनुबाई भात लई जाय।
अवतज जो धणिएरजी न देखिया,
हो राजा-
एक जो मारी, दूसरी, न हो राजा
तीसरी मऽ जोड़या दुई हाथ।
जो तुम धणियेर सोठी मारसो हो राजा
नहीं म्हारो माय न बाप,
नहीं हमारी माय न मावसी हो राजा,
कुण म्हारो आणो लई जाय।
कलयुग म अमुक भाई मानवी राजा
ऊ तुम्हारो आणो लई जाय।
अमुक भाई दीसे तुमख बाजुट हो राजा
लाड़ीबाई लागसे तुम्हारा पाँय।