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उदयति मिहिरो, विगलति तिमिरो / जानकीवल्लभ शास्त्री

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उदयति मिहिरो,विगलति तिमिरो
भुवनं कथमभिरामम्
प्रचरति चतुरो मधुकरनिकरो
गुंजति कथमविरामम्॥
विकसति कमलं,विलसति सलिलम्
पवनो वहति सलीलम्
दिशिदिशि धावति,कूजति नृत्यति
खगकुलमतिशयलोलम्॥
शिरसि तरूणां रविकिरणानाम्
खेलति रुचिररुणाभा
उपरि दलानाम् हिमकणिकानाम्
कापि हृदयहरशोभा॥