भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

उमंग / केदारनाथ मिश्र ‘प्रभात’

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सागर-सा उमड़ पडूं मैं
लहरें असंख्य फेलाकर
विचरूं झंझा के रथ पर
मैं ध्वंसक रूप बनाकर।
मैं शिव-सा तांडव दिखलाऊं
मैं करूं प्रलय-सा-गर्जन
बिजली बनकर तड़कूं मैं
कांपे नभ अवनी निर्जन।