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उम्मीद के बग़ैर / अत्तिला योझेफ़

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मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: अत्तिला योझेफ़  » उम्मीद के बग़ैर

धीरे-धीरे, सुस्ताते हुए मैं,
जैसे कोई आराम फ़रमाने आया हो
उस उदास, रेतीले, गीले तट पर
और चारों ओर देखता हुआ और घोर दारिद्र्य से मुक्त
समझदारी से भरा सर डुलाता, और इससे अधिक
की उम्मीद नहीं करता

बस इसीलिए अपनी गिरवी को वापस पाने की
कोशिश करता हूँ
बिना किसी छल के लापरवाही से
चिनार के पेड़ की सफ़ेद पत्ती पर
एक चाँदी की कुल्हाडी हल्के-हल्के चलती है

रिक्तता की एक डाल पर
बेआवाज़ मेरा काँपता दिल बैठा है

वह देखता है, देखता जाता है अनगिनत बार
नाज़ुक सितारे इसे देखने चारों ओर जुट गए

स्वर्ग की नीली गुफा में....
स्वर्ग की नीली गुफा में घूमता है
एक ठंडा और वार्निश किया डायनेमो
शब्द चमकते हैं मरे दाँतों में, तय करते हैं

उफ़्फ़ बेआवाज़ नक्षत्रो! इसलिए-
अतीत मुझमें पत्थर की तरह गिरता है
हवा की तरह बेआवाज़ क्षितिज से होकर
काल, मौन, एकांत की धारा

तलवार चमकती है और मेरे बाल
मेरी मूँछें, एक मोटा प्यूपा
अनित्यता के मेरे मुँह में जितना स्वाद है

मेरा दिल दुखता है, शब्द ठंडक पहुँचाते हैं इससे होकर
उन्हें, जिनकी आवाज़ कोई मतलब पैदा करती है..

रचनाकाल : 1933

अंग्रेज़ी से अनुवाद : उमा