भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
उर में सागर / रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
Kavita Kosh से
हिन्दी शब्दों के अर्थ उपलब्ध हैं। शब्द पर डबल क्लिक करें। अन्य शब्दों पर कार्य जारी है।
मिले अधरों से अधर
महके धरती अम्बर
छनी हाला अंगूरी।
उर में सागर छलके
मद से बोझिल पलकें
कपोल हुए सिंदूरी।
खुले लाज- भरे बोल
रहे मादकता घोल
साधें हो गईं पूरी।
मन में उठी तरंग
तन भी डूबा है संग
मिट गई सारी दूरी।
(10-5-84: कश्ती मार्च 85)