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उसी की देखी हुकूमत भी हुक्मरानों पर / चित्रांश खरे

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उसी की देखी हुकूमत भी हुक्मरानों पर
वही खुदा है जो जो बैठा है आसमानो पर

इन हादसों पे भी इतना कभी नही रोया
मैं जितना रोया सियासत तेरे बयानो पर

है मुझको इतनी मुहब्बत मेरे उसूलों से
गुरूर जितना है तुझको तेरे खज़ानों पर

मुझे है खौफ तमंचे न थाम लें बच्चे
कि अब तो मिलता है बारूद भी दुकानों पर

मै हिन्दी उर्दू को माँ का मुकाम देता हूँ
हमैशा जान लुटाता हूँ इन ज़ुबानों पर

भला वो कैसे भरोसा रखे खुदाई में
गिरी हो बिजलियां बस जिनके आशियानों पर