भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

उस तरफ तो तेरी यकताई है / फ़रहत एहसास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

उस तरफ तो तेरी यकताई है
इस तरफ़ में मेरी तनहाई है

दो अलग लफ़्ज नहीं हिज्र ओ विसाल
एक में एक की गोयाई है

है निशाँ जंग से भाग आने का
घर मुझे बाइस-ए-रूसवाई है

हब्स हैं मश्रिक ओ मग़रिब दोनेां
अब न पछवा है न पुरवाई है

घास की तरह पड़े हैं हम लोग
न बुलंदी है न गहराई है

जिस बयाबाँ में हूँ मैं आबला-पा
वो बयाबाँ मेरी सच्चाई है

उस की बातों पे ख़फा मत होना
‘फरहत’ एहसास तो सौदाई है