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ऊँची ए मड़वा छरइह दुलरइते बाबा / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

ऊँची ए मड़वा छरइह[1] दुलरइते[2] बाबा।
ऊँची होतो[3] नाम तोहार हे॥1॥
झारी[4] गलइचा[5] बिछइह[6] दुलरइते भइया।
ऊँची होतो नाम तोहार हे॥2॥
धरती में नजर खिरइह[7] दुलरइते बर।
देखतो नगरी के लोग हे॥3॥

शब्दार्थ
  1. छवाना, अच्छादन कराना
  2. प्यारे
  3. होगा। ‘नाम ऊँचा होना’, मुहावरा है, अर्थात् यश विस्तार
  4. झाड़कर
  5. गलीचा, कालीन
  6. बिछाना
  7. गड़ाना। ‘खिरइह’ का भोजपुरी रूप ‘खिलइह’ होता है। धरती में नजर खिलाना का अर्थ होता है, धरती के भीतर तक दृष्टि प्रवेश करा देना