भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ऊधौ रूप राधकाजू कौ / ईसुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ऊधौ रूप राधकाजू कौ,
कृस्न बिछुरतन सूकौ।
मन उड़जात तिनूका नाँई
मन्द मन्द में फूँकौं।
गदिया पलंग गदेला त्यागो
परवौ है अब भू कौ।
भुगतै मिटें, करौ कछु हू है,
कछू पाय आगंूकौ।
ईसुर पार लगत ना बँदरा
फिरत डार कौ चूकौ।