भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

ऊपर बदरा घहरायं रे / बघेली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

ऊपर बदरा घहरायं रे तरी गोरी पानी का निकरी
ऊपर बदरा घहरायं रे तरी गोरी पानी का निकरी
जाइ कह्या मोरे राजा सुसुर से
द्वारे माँ कुंअना खोदावैं
तौ गोरी धना पानी का निकरीं
ऊपर बदरा घहरायं रे तरी गोरी पानी का निकरी
जाइ कह्या मोरे राजा जेठ से
कुंअना मा जगत बंधावैं तौ गोरी धना पानी का निकरीं
ऊपर बदरा घहरायं रे तरी गोरी पानी का निकरी
जाइ कह्या मोरे बारे देवर जी
रेशम रसरी मंगावैं तौ गोरी धना पानी का निकरीं
ऊपर बदरा घहरायं रे तरी गोरी पानी का निकरी
जाइ कह्या मोरे राजा बलम से
सोने घइलना भंगावैं तौ गोरी धना पानी का निकरीं
ऊपर बदरा घहरायं रे तरी गोरी पानी का निकरी