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एक्के सुर... / रूप रूप प्रतिरूप / सुमन सूरो

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एक्के सुर मधुर-मधुर
अणु-कण में लहरै!
सुरुज-चान, जड़-सप्राण,
मुहुर-मुहुर सिहरै!

गिरि-सागर वन-उपवन,
मरु-बंजर पवन-पवन,
तन-तन में, मन-मन में,
छन-छन में पसरै!

उपटै सुर तीन काल,
नया छन्द, नया ताल,
भाव-मगन, बेसुध मन,
जन-जन में बिचरै!

नाचै नटराज निसुध,
डिम-डिम-डिम डमरू डुग,
लोक-नाँच, फेर-पाँच,
अंग-अंग सँसरै!