भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एक नज़र क्या इधर हो गई / गणेश बिहारी 'तर्ज़'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक नज़र क्या इधर हो गई
अजनबी हम से हर नज़र हो गई

ज़िंदगी क्या है और मौत क्या
शब हुई और सहर हो गई

उन की आँखो में अश्क़ आ गए
दास्ताँ अपनी मुख़्तसर हो गई

चार तिनके ही रख पाए थे
और बिजलियो को ख़बर हो गई

छिड़ गई किस के दामन की बात
ख़ुद-ब-ख़ुद आँखे तर हो गई !!