भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एक बूँद जल / रामनरेश पाठक

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मेरे गौशाला के खूंटों पर
दम तोड़ते
तीन जोड़ी बैलों की
आँखों की गहराई में
रुका हुआ एक बूँद जल
हर क्षण दिखता है
मुझे नींद नहीं आती।

टूटी खात पर
हताश पड़े
मेरे बापू की पथरायी, निर्निमेष
आखों की गहराई में
कठिनाई से रिसता हुआ एक बूँद जल
हर क्षण दिखता है
मुझे नींद नहीं आती।

मेरे खेतों में फट आई
दरारों के तलान्त पर
उबलता हुआ एक बूँद जल
हर क्षण दिखता है
मुझे नींद नहीं आती।