भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

एक संपूर्ण आकार / एम० के० मधु

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

 
हर सुबह
खुलती है मेरी नींद
मस्जिद की अज़ान से

शुरू करता हूं
अपनी दिनचर्या
मंदिर की घंटियों के साथ

मन को करता हूं
शोधित
गिरजा की कैरोल-ध्वनि पर

मस्तिष्क में लाता हूं
संस्कार
गु्रुद्वारे की गुरुवाणी पर

कुरान की आयतें
मुझमें भरती हैं
साधना के स्वर

रामायण
मुझमें देता है
आदर्श
गीता देती है
कर्म का पाठ
बुद्ध की जातक कथाओं से
सीखा है-- अहिंसा और सत्य

बाइबिल सिखाता है
त्याग और परोपकार
गुरुग्रंथ समझाता है
स्नेह और विश्वास

सारे अध्यात्म
एक साथ मिलकर
बनाते हैं
मेरे अन्दर
एक सम्पूर्ण आकार
मानव का।