भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एक हंगामा बपा है अर्सा-ए-अफ़्लाक पर / सालिम सलीम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक हंगामा बपा है अर्सा-ए-अफ़्लाक पर
ख़ामुशी फैला रखी है आज मैं ने ख़ाक पर।

अब मिरा सारा हुनर मिट्टी में मिल जाने है
हाथ उस ने रख दिए हैं दीदा-ए-नमनाक पर।

रोज़ बढ़ती ही चली जाती है बीनाई मिरी
रोज़ रख देता हूँ आँखों को तेरी पोशाक पर।