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एना नहि करू / चंदन कुमार झा
Kavita Kosh से
ओह
फेर किएक सुखाइत घावकेँ
खैंठी ओदारि पुनर्जीवित करैत छी
ओह
फेर किएक जरलाहापर
नोन छिटैत छी
ओह
फेर किएक अन्हार घरमे
डिबिया बारैत छी
चुप रहू
सगबगेबो नहि करू
सुतू आ सूतय दिअ हमरो
निरोग, शीतल
आ सुदीप्त भोरक प्रतीक्षामे